पटना न्यूज डेस्क: पटना विश्वविद्यालय को पीएम-उषा (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) के तहत मिली 100 करोड़ रुपये की राशि अब तक खर्च नहीं हो सकी है। यह राशि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने, रोजगार उन्मुख शिक्षा विकसित करने, तकनीक आधारित पढ़ाई को बढ़ावा देने और नैक मान्यता सुधारने के लिए दी गई थी। इस देरी पर शिक्षा मंत्रालय के उच्चतर शिक्षा विभाग ने पटना विवि से 25 नवंबर तक विस्तृत रिपोर्ट भेजने को कहा है।
पटना विश्वविद्यालय और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा—दोनों को अगस्त 2025 में 100-100 करोड़ रुपये की यह सहायता दी गई थी। शिक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में पत्र प्रधान सचिव, उच्चतर शिक्षा, बिहार सरकार को भेजा है, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने दोनों विश्वविद्यालयों को जानकारी दी है। पत्र मिलने के बाद पटना विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुलपति की अगुवाई में ऑनलाइन बैठक कर पूरी स्थिति की समीक्षा की।
बैठक में विभागाध्यक्षों और कॉलेज प्राचार्यों को कार्ययोजना तेज करने के निर्देश दिए गए। वहीं 27 और 28 नवंबर को शिक्षा विभाग के अधिकारी दोनों विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों के साथ एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में बैठक करेंगे। दोनों विश्वविद्यालयों के पास अब 31 मार्च तक चार महीने का समय बचा है, जिसमें इस राशि का उपयोग करना अनिवार्य है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य राज्य संचालित उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता सुधार, रोजगार योग्य कौशल वाले छात्र तैयार करना, ई-लर्निंग को बढ़ावा देना और नैक मान्यता में सुधार सुनिश्चित करना है। देशभर के 26 विश्वविद्यालयों को इस योजना में शामिल किया गया था, जिनमें बिहार से पटना विश्वविद्यालय और एलएनएमयू भी शामिल हैं। पीएम-उषा (पूर्व में रूषा 2.0) के तहत इन विश्वविद्यालयों को 50 करोड़ से 100 करोड़ रुपये तक की राशि दी गई थी।